वक़्त

मैं अविनाशी
मैं अभिलाषी
मैं ही काशी
आज़ाद हूँ मैं
सबकी मुराद हूँ मैं
किसी पर सख्त
तो किसी पर मेहरबान हूँ
नभ सा विशाल हूँ मैं
काल हूँ मैं
मैं माया, मैं ही सफाया
सबका प्रमाण हूँ
मैं ही क़द्रदान हूँ
आदि मैं, मैं ही अंत हूँ
मैं असुर, मैं ही संत हूँ
मैं अपठित ग्रंथ हूँ
मैं उत्तर, मैं ही सवाल हूँ
मैं काल हूँ…..!!

आज़ादी

आज़ादी एक अरमान है
किसी का डर, किसी की कमज़ोरी तो किसी की पहचान है
सबको इसकी चाह है, पर क्यों मुश्किल इसकी राह है
किसी के पास तो किसी से दूर
किसी का जुनून, तो किसी को करती मजबूर
आज़ादी किस्से ये भी एक सवाल है
जवाब है, तो समय कम है
आज़ाद हो कर भी कैद का ही गम है
कुछ पाने की तो कुछ खोने की
जो ना हो वो भी होने की
यह जंग भी एक आज़ादी है
जीत है या हार है
ये किसी को मालूम नही
बस पाना है इसको, कीमत की परवाह नही
सफलता है, बर्बादी है
इस जद्दोजहद में एक दिन साँसों से आज़ादी है!!

यारी

सताता हूँ उनको
अपना हक समझके
दिल का हाल बताता हूँ उनको
फ़र्ज़ समझके
मुश्किल होते है मिलने ऐसे दोस्त
बिन कहे हो जाता है जहाँ एहसास
आह से पहले जान जाते दर्द का राज़
है यारी अपनी ऐसी कुछ की मिसाल है
हँसी, खुशी, रूठना, मनाना… सौ बवाल है
थोड़े अच्छे, हल्के पागल तो कुछ बेकार है
जैसे भी है मेरे यार है

फिर से

कहना तो नही था
पर मजबूर था
खो देने का डर था
पर कहने का सुकून था

पहले ऐसा ना था
बेखबर मैं हो गया
जिन रास्तों से था वाकिफ़
फिर वही खो गया

प्यार का मुरीद नही
हां की उम्मीद नही
तेरी ना का गम नही
बस……सोचा कैसा होता मंज़र
होते अगर हम कहीं

अमुल्य

वो माफी मांगेगा
तुम माफ कर दोगे
वो सफाई देगा
तुम अपना दिल साफ कर दोगे

जिसको कहानी माना, तुम उसका किस्सा थे
वो तुम्हारी जिंदगानी, तुम बस एक हिस्सा थे

वो आगे चल दिया, तुम किसके सहारे पर
उसने सौ घाट घूमे, तुम वही किनारे पर

वो मनाएगा नही, तुम फिर भी पिघल जायोगे
बिना उसकी निराशा के तुम अपनी आशा भूल जायोगे

खुद की हस्ती खोकर, कैसे जियोगे
जानते हुए भी ज़हर कितनी बार पियोगे

ख़ुशी है..बना दिया तुम्हे पत्थर
समझ तुम्हे खुदा, कोइ फिर से झुकाएगा सर्

हिंदी दिवस

पैसों का मोल नही
भावनाओं से बिकते है हम
हिंदी में लिखते है हम

विविधता हमारी पहचान हैं
हर भाषा का यहाँ संम्मान हैं
हिंदी का पर अलग शोर हैं
जो बांधे सबको साथ
ये वो डोर हैं

मुलाक़ात

कहाँ वो रुक कर कोई बात करके जाता है
हमेशा अधूरी मुलाकात करके जाता है

वक़्त निकाल कर मिलने तो आता हूँ
अधूरी या पूरी .. मुलाक़ात तो करके जाता हूं

माना समय कम होता है
इसी बात का तुझे गम होता है

होने से मेरे मुश्किलो का हल होगा नही
बस तेरे चेहरे पर मुस्कुराहट होगी
ओर वैसा कोई पल होगा नही

इसलिए तेरी नाराज़गी सह जाता हूँ
वक़्त निकाल कर मिलने आता हूँ
अधूरी ही सहीमुलाकात हमेशा करके जाता हूं!!